नागरिकता कानून पर बंगाल में डरे हुए लोगों का हिंसक प्रदर्शन, आगजनी, तोड़फोड़, कारण समझ से परे

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File Photo

नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ लगातार दूसरे दिन शनिवार को भी पश्चिम बंगाल के कई हिस्सों में हिंसक प्रदर्शन हुए। कई बसों और एक रेलवे स्टेशन परिसर में आगजनी की गई। खासकर मुर्शिदाबाद और उत्तरी 24 परगना जिलों तथा हावड़ा ग्रामीण से हिंसा की खबरें मिली हैं। इस बीच, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हिंसक प्रदर्शन और तोड़फोड़ करने वालों को कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है।

 

इंडिया टीवी के रिपोर्ट के मुताबिक गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने करीब 15 बसों को आग के हवाले कर दिया, जिनमें सार्वजनिक के साथ-साथ निजी बसें भी शामिल हैं। उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग-छह और राष्ट्रीय राजमार्ग-दो को कोलकाता से जोड़ने वाले कोना एक्सप्रेसवे पर हावड़ा में यातायात अवरुद्ध कर दिया, इससे एक्सप्रेसवे पर यातायात थम गया। मुर्शिदाबाद में राष्ट्रीय राजमार्ग 34 और जिले की कई अन्य सड़कों को बाधित कर दिया गया। यह राजमार्ग उत्तरी और दक्षिणी बंगाल को जोड़ने वाला एक प्रमुख मार्ग है। वहां बसों को भी आग के हवाले कर दिया गया। जिले में अन्य सड़कों को भी बाधित कर दिया गया।

 

प्रदर्शनकारियों ने हावड़ा जिले के दोम्जुर इलाके में राष्ट्रीय राजमार्ग छह भी बाधित कर दिया। उन्होंने टायर जलाए और कई वाहनों में तोड़ फोड़ की। पूर्वी रेलवे के सियालदह-हसनाबाद के बीच रेल सेवाएं भी बाधित हैं। बीती रात से ग्रामीण हावड़ा के बगनान इलाके में 20 दुकानों में आगजनी की गई। सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने हावड़ा जिले में संकरेल रेलवे स्टेशन परिसर के एक हिस्से में भी आगजनी की। प्रदर्शनकारियों ने स्टेशन पर मौजूद रेलवे पुलिस बल के कर्मियों को भी पीटा।

 

दक्षिण पूर्वी रेलवे के हावड़ा-खड़गपुर खंड पर भी सुबह 11 बजे से ट्रेन सेवाएं ठप रहीं, क्योंकि प्रदर्शनकारी सांकरील, नालपुर, मोरीग्राम और बकरनवाबाज़ स्टेशनों पर पटरियों पर बैठ गए। रेलवे के एक अधिकारी ने बताया कि आठ एक्सप्रेस ट्रेनों सहित 20 ट्रेनें दक्षिण पूर्व जोन में विभिन्न स्टेशनों पर रोकी गईं। इस खंड पर कई ट्रेनें भी रद्द कर दी गईं। रद्द की गईं ट्रेनों में लंबी दूरी की ट्रेनें भी हैं जिनमें 12222 हावड़ा-पुणे दुरंतो एक्सप्रेस, 120889 हावड़ा-तिरुपति हमसफर एक्सप्रेस, 22877 हावड़ा एर्नाकुलम अंत्योदय एक्सप्रेस और 12860 हावड़ा -सीएसएमटी गीतांजलि एक्सप्रेस शामिल हैं। 12245 हावड़ा-यशवंतपुर दुरंतो एक्सप्रेस भी रद्द की गई है।

 

हिंसा का कारण समझ से परे –

असम के प्रदर्शन की बात करें तो उसका एक लंबा इतिहास है और उनकी अपनी मांगे रही है, पूर्ववर्ती सरकारों के साथ समझौते भी रहे हैं, और उनका प्रदर्शन नागरिकता न देने की मांग को लेकर है! वो चाहते हैं की असम में किसी को न बसाया जाए, चाहे वो रोहिंग्या हो, बंगलादेशी मुसलमान हो या सताए गए हिन्दू हो! लेकिन बंगाल का विरोध प्रदर्शन एकदम नया है, समझ से परे है और अपने कौम को नागरिकता दिए जाने को लेकर है!, बंगाल का प्रदर्शन मुसलमानों को भी नागरिकता देने की मांग जैसा लगता है! दोनों प्रदर्शन एकदम एक सौ अस्सी डिग्री अलग दीखता है!

 

अगर पाकिस्तान और बांग्लादेश के मुसलमानों को नागरिकता नहीं दी जा रही तो इससे भारत के मुसलमानों को क्या तकलीफ हो सकती है? पाकिस्तान के मुसलमानों ने अपने हिस्से की जमीन अलग कर ली है, उन्हें नागरिकता देने का कोई मतलब नहीं बनता! ऐसे में पाकिस्तानी मुसलमानों के नागरिकता के मसले पर, भारत की सम्पति को नुकसान पहुँचाना, आपको क्या सिद्ध करता है, खुद ही तय कर लो!

 

कुछ मौलाना मौलवी लोगों को उकसा रहे हिंसा करने के लिए, ये हिंसा जुम्मे की नमाज के बाद ज्यादा उग्र हुई है, इसका क्या मतलब निकाला जाए, की इनको भारत से नहीं सिर्फ इस्लाम से प्यार है? या कुछ लोग पाकिस्तान के गजवा-ए-हिंद के साजिश को भारत में झटका लगने से बौखलाए हुए हैं? अगर ऐसा नहीं होता तो पाकिस्तान और बांग्लादेश के मुसलमानों को नागरिकता न मिलने पर भारत के मुसलमानों का प्रदर्शन करने का कोई कारण नहीं बनता!

 

रही बात पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के अल्पसंख्यकों को भारत की नागरिकता देने की तो ये भारत की सदियों पुरानी परंपरा है, दुसरे जगह सताये गए लोगों को भारत ने शरण दी है! अब ये मत कह देना की पाकिस्तान और बांग्लादेश में मुसलमान भी सताए हुए हैं, इसलिए उन्हें भी नागरिकता दी जाए, पूरी दुनियां हँसेगी! ये प्रदर्शन ठीक नहीं है, खासकर राष्ट्रिय सम्पति को नुकसान पहुँचाने के स्तर की! हिंसक प्रदर्शन करने वाले खुद को ही एक्सपोज कर रहे हैं, बाद में कोई शक करे तुम्हारे ऊपर तो ये मत कहना की लोग शक की नजर से देखते हैं! माफ़ करना, लेकिन हरकतें तो शक पैदा कर ही रही है!