वायुमंडल की संरचना एवं इसकी विभिन्न परतें

वायुमंडल की संरचना : वायुमंडल को निम्न परतों में बाँटा गया है – क्षोभमंडल (Troposphere), समतापमंडल (Stratosphere), ओजोनमंडल (Ozonosphere), आयनमंडल (Ionosphere), बहिर्मंडल (Exosphere)!

 

क्षोभमंडल (Troposphere) : यह वायुमंडल का सबसे निचे वाली परत है! इसकी ऊँचाई ध्रुवों पर 8 किमी तथा विषुवत रेखा पर लगभग 18 किमी होती है! क्षोभमंडल में तापमान की गिरावट की दर प्रति 165 मी० की ऊँचाई पर 1 डिग्री C अथवा 1 किमी की ऊँचाई पर 6.4 डिग्री C होती है! सभी मुखय वायुमंडलीय घटनाएँ जैसे बादल, आँधी एवं वर्षा इसी मंडल में होती है! इस मंडल को संवहन मंडल कहते है, क्योंकि संवहन धाराएं इसी मंडल की सीमा तक सीमित होती है! इस मंडल को अधो मंडल भी कहते हैं! और पढ़ें : विभिन्न यंत्रों और उपकरणों के अविष्कार और उनके देश

 

समतापमंडल (Stratosphere) : समतापमंडल 18 से 32 किमी की ऊँचाई तक है! इसमें ताप समान रहता है! इसमें मौसमी घटनाएँ जैसे आँधी, बादलों की गरज, बिजली की कड़क, धूल कण एवं जलवाष्प आदि कुछ नहीं होती है! इस मंडल में वायुयान उड़ाने की आदर्श दशा पायी जाती है! समतापमंडल की मोटाई ध्रुवों पर सबसे अधिक होती है, कभी कभी विषुवत रेखा पर इसका लोप हो जाता है! कभी कभी इस मंडल में विशेष प्रकार के मेघों का निर्माण होता है, जिसे मूलाभ मेघ (Mother of pearl cloud) कहते हैं!

 

ओजोनमंडल (Ozonosphere) : धरातल से 32 किमी से 60 किमी के मध्य ओजोन मंडल है! इस मंडल में ओजोन गैस की एक परत पायी जाती है, जो सूर्य से आने वाली पराबैंगनी किरणों को अवशोषित कर लेती है! इसलिए इसे पृथ्वी का सुरक्षा कवच कहते हैं! ओजोन परत को नष्ट करने वाली गैस CFC (क्लोरो फ्लोरो कार्बन) है, जो एयर कंडिशनर, रेफ्रिजरेटर आदि से निकलती है! ओजोन परत में क्षरण CFC में उपस्थित सक्रिय क्लोरिन (Cl) के कारण होती है! ओजोन परत की मोटाई नापने में डाब्सन इकाई का प्रयोग किया जाता है! इस मंडल में ऊँचाई के साथ तापमान बढ़ता जाता है, प्रति एक किमी की ऊँचाई पर तापमान में 5 डिग्री C की वृद्धि होती है!

 

आयनमंडल (Ionosphere) : इसकी ऊँचाई 60 किमी से 640 किमी तक होती है! यह भाग कम वायुदाब तथा पराबैंगनी किरणों द्वारा आयनीकृत होता रहता है! इस मंडल में सबसे नीचे स्थित D-layer से long radiowaves एवं E1, E2 और F1, F2 परतों से short radio wave परावर्तित होती है! जिसके फलस्वरूप पृथ्वी पर रेडियो, टेलीविजन, टेलीफोन एवं रडार आदि की सुविधा प्राप्त होती है! संचार उपग्रह इसी मंडल में अवस्थित होते हैं!

 

बाह्यमंडल (Exosphere) : 640 किमी से ऊपर के भाग को बाह्यमंडल कहा जाता है! इसकी कोई उपरी सीमा निर्धारित नहीं है! इस मंडल में हाईड्रोजन एवं हीलियम गैस की प्रधानता होती है! और पढ़ें : विश्व के प्रमुख खनिज, उत्पादक देश एवं उनके स्थान

 

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